इफराजुल की हत्या का कारण ‘लव जिहाद’ नही ‘भगवा आतंकवाद’ है !

राजस्थान के राजसमन्द में प्रवासी बंगाली मजदूर इफराजुल की एक दलित शम्भू लाल रेगर उर्फ शम्भू भवानी द्वारा की गई निर्मम हत्या की घटना से मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत दुःख महसूस कर रहा हूँ ,कोई भी इंसान कैसे इस बेरहमी से किसी निर्दोष ,निहत्थे इंसान का कत्ल कर सकता है ,यह अत्यंत क्षुब्ध करने वाला अमानवीय कृत्य है ,मैं इस हत्याकांड की कड़ी भर्त्सना करता हूं और शर्मिंदगी व्यक्त करता हूँ कि मैं उस वर्ग से आता हूँ ,जिससे कातिल का संबंध है ।
यह और भी दुःखद बात है कि कातिल दरिंदे ने इस कुकृत्य के लिए 6 दिसम्बर का दिन चुना ,जो बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण का दिवस है ,जिस दिन हम लोग मांडल में दलित मुस्लिम एवम सभी जातियों के लोग मिल कर रक्तदान कर रहे थे ,उस दिन दलित समाज का ही एक व्यक्ति निकटवर्ती जिले में एक बेकसूर मुसलमान का रक्त बहा रहा था ,यह घटना मेरे लिए बहुत ही क्षोभ का कारण बन गई है ,जिस निर्मम तरीके से धोखे से बुलाकर 50 वर्षीय इफराजुल को मारा गया ,इस कायराना कत्ल की जितनी भी निंदा की जाए कम है ,मैं कातिल दलित युवक शम्भू भवानी पर लाखों लानतें भेजता हूँ और स्वयं को कातिल के समुदाय का हिस्सा होने की वजह से गुनाहगार महसूस करता हूँ ।
आखिर इस देश का दलित किस आत्मघाती राह पर जा रहा है ? हिंदुत्व का यह भगवा जिहादी रास्ता क्या दलित युवाओं के लिए उपयुक्त है ? क्या बाबा साहब की संतानों को संविधान को ताक में रख कर ऐसे कुकृत्य करने चाहिए ? मेरा मानना है कि शम्भू लाल रेगर ने सिर्फ इफ्तारूल का ही कत्ल नही किया बल्कि भारत के संविधान का भी कत्ल कर दिया है ,उसने दलित और मुस्लिम जैसे उत्पीड़ित और वंचित समुदाय के मध्य मौजूद सौहार्द का भी कत्ल कर दिया है ,उसके कुकृत्य से इन दोनों समुदायों के बीच के भातृभाव को गंभीर क्षति पंहुची है ,जो कि बेहद दुख का विषय है ।

मेरा यह मानना है कि यह शम्भू लाल नामक हत्यारा एक मुस्लिम विरोधी विचारधारा के लोगों द्वारा प्रशिक्षित आतंकी है ,जिसने भारतीय गणराज्य को चुनोती दी है ,उसका कृत्य राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में है ।
राजस्थान पुलिस इसे महज़ एक नशे के आदी युवक द्वारा की गई सिरफिरी घटना मान रही है,लेकिन मेरा मानना है कि यह किसी एक सिरफिरे का काम नही है ,यह उस विषैली विचारधारा का परिणाम है जो देश के युवाओं में अपने ही देश वासियों के प्रति घृणा भर रही है ।यह हिंदुत्व की नफरत की राजनीति का ही परिणाम है कि एक निर्दोष परदेशी मुसलमान को अकारण ही हत्या का शिकार बना कर उसे लव जिहाद के बदले का रूप देने की कुचेष्टा की गई है ।
इफराजुल की हत्या किसी रंजिश अथवा प्रेमप्रसंग या गुस्से का नतीजा नही हो कर एक धार्मिक अल्पसंख्यक और परप्रांतीय अकेले व्यक्ति का सहज शिकार करने जैसा है ,जिसे महज मुसलमान होने की वजह से एक धर्मान्ध हिन्दू ने कायराना तरीके से मार गिराया ,उसका कोई अपराध नही था ,उसके बेरहम कत्ल को लव जिहाद ,इस्लामिक आतंकवाद ,धारा 370 और राममंदिर निर्माण से जोड़ कर जिस तरह से उसे हिंदू शौर्य का रंग दिया गया है ,वह साबित करता है कि हत्यारे शंभु का गहन प्रशिक्षण और ब्रेनवाश किया गया तथा उसके ज़ेहन में मुसलमानों के लिए काफ़ी गहरी नफरत बोई गई ,संभवतः किसी भगवा कैम्प में उसे इस आतंकी घटना को करने की पूरी ट्रेनिंग मिली है ,वरना बिना बात कोई किसी मेहनतकश इंसान को क्यों निशाना बनाता और क्यों इस भयानक कांड को लाइव करने का दुस्साहस करता ?

आज राजसमन्द का दौरा करने और घटना से संबंधित वीडियोज देखने एवम तथ्यों को समझने के बाद मुझे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि शभु लाल रेगर नामक इस दलित युवक के पीछे मुस्लिम विरोधी विचारधारा का समूह कार्यरत है ,यह सामान्य हत्या नही है ,यह एक सोची समझी प्लानिंग का परिणाम है ,शम्भू नामक हत्यारा ना केवल सुप्रशिक्षित है बल्कि उसकी भाषा शैली भी पूर्णतः इस देश की दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी शक्तियों की है ,यहां तक कि कातिल दरिंदे ने अपने कुकृत्य को जायज ठहराने के लिए जो वीडियो बना कर वायरल किये है ,उनमें वह भगवा झंडे के साथ बैठा नज़र आता है ,उसने जो भी बातें कही है ,वे भी संघ की विचारधारा की बातें ही है ,इसलिए उसके हिंदूवादी संगठनों से रिश्ते को नकारा नही जा सकता है ।

मेरा मानना है कि इस घटना से यह संकेत मिलता है कि इस देश के दलित युवाओं को योजनाबद्ध ढंग से मुस्लिमों के ख़िलाफ़ खड़ा किया जा रहा है ,दोनों समुदायों के मध्य स्थायी दुश्मनी और बैरभाव की दीर्घ परियोजना लागू की जा चुकी है ,दुःखद तथ्य यह है कि दलित तबके के नोजवान इस नरभक्षी हिंदुत्व की चपेट में आ रहे है और वे एक आत्मघाती हिंदुत्व के हरावल दस्ते बनते जा रहे है ,जो कि सचमुच चिंता का विषय है ।

सबसे दुःखद और निराशा की बात यह है कि इस खतरे को दलित बहुजन मूलनिवासी संगठन समझने को तैयार नही है ,इसलिए वे राजसमन्द जिले में हुए इफराजुल के निर्मम कत्ल के ख़िलाफ़ कुछ भी बोल नही पा रहे है ,अम्बेडकरवादियों की यह खामोशी उनकी सामुदायिक कायरता को दर्शाती है ,उनकी यह चुप्पी दलित समाज को भगवा जिहाद के खतरे की तरफ धकेल देगी ।

मैं पुनः राजसमन्द के इस कांड की कड़ी भर्त्सना करता हूँ और दुर्दांत हत्यारे शम्भू भवानी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही और सजा की मांग करता हूँ ,पश्चिमी बंगाल में रह रहे इफराजुल के परिवार से माफी मांगता हूं कि एक दलित ने यह कुकृत्य करके हम सबको शर्मिंदा किया है ।

मैं इफराजुल के परिवार के प्रति अपनी संवेदना ज़ाहिर करता हूँ और उनकी न्याय की लड़ाई में साथ देने का वादा करता हूँ ।

-भंवर मेघवंशी
(सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार )

विडियो भी देखें : https://youtu.be/79xekfnXyls

प्रस्तुतकर्ता : सिकन्दर कुमार मेहता

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धर्म शास्त्र,विवेक और विज्ञान के दुश्मन हैं, कैसे ?

धर्म शास्त्र विवेक और विज्ञान के दुश्मन हैं, कैसे आईये देखते हैं:

1. विज्ञान व भूगोल :
गंगा हिमालय के गंगोत्री हिमनद (ग्लेशियर) से निकलती है।

जबकि धर्म व शास्त्र :
गंगा शिवजी की जटा से निकलती है और भगीरथ इसे स्वर्ग से धरती पर लाया था।

2. विज्ञान व भूगोल:
जल-वाष्प भरे बादल जब हवाओं के सम्पर्क में आते हैं तो वर्षा होती है

जबकि धर्म व शास्त्र :
वर्षा इंद्र देवता कराते हैं।

3. विज्ञान व भूगोल :
पृथ्वी अपनी धुरी पर 23 डिग्री झुकी हुई है। जब दो tectonic plates आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है।

जबकि धर्म व शास्त्र :
पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और जब वह करवट बदलता है तो भूकम्प आता हैं। दूसरी जगह लिखा है कि प्रथ्वी बैल/गाय के सीगं पर टिकी हुई है और थक कर जब वह सीगं बदलता/ती है तो भूकम्प आता है।

4. विज्ञान व भूगोल :
पृथ्वी और चन्द्रमा परिक्रमा करते हुऐ जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य आ जाती है तो चंद्र ग्रहण होता है।

जबकि धर्म व शास्त्र :
चंद्र ग्रहण के समय राहु चन्द्रमा को खा जाता है।

5. विज्ञान :
हवाई जहाज के माध्यम से मानव हवाई सैर करता है।

जबकि धर्म व शास्त्र :
बिना किसी माध्यम के तथाकथित देवी देवता और राक्षस हवा में उड सकते थे।

6. विज्ञान :
यहां कौसो दूर भी दूरसंचार के माध्यम से मानव एक दूसरे से मन की बात कर सकते हैं।

जबकि धर्म व शास्त्र :
केवल साधु- संत ही बिना किसी माध्यम के ही मन की बात उन्हीं के बनाये ईश्वर से कर लिया करते थे।

अब फैसला आपका ?

आप अपने बच्चों का बौद्धिक विकास करने के लिए उन्हें विज्ञान पढ़ाते हैं या अंधविश्वासी बनाने के लिए उन्हे अप्रमाणित धर्म व शास्त्र ।

प्रस्तुतकर्ता : सिकन्दर कुमार मेहता

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इंसान अंधविश्वासी क्यू बनता है ?

इस पोस्ट को पूरा पढ़ने से पहले ये समझ लेना जरूरी है कि कोई भी इंसान पैदा होता है, तो, वो कोई धर्म लेकर पैदा नही होता, उसे बचपन से जैसा सिखाया जाता है वो ठीक वैसा ही वो अनुसरण करता है,
1930 से रूस वालो ने अपने बच्चों को ये सिखाया की ना ही आत्मा होती है और ना ही परमात्मा होता है, पूरे 25 वर्ष लगे ये बात समझाने में तब जाकर उनकी पीढ़ी ये बात को समझी और आज रूस नास्तिक देश है, और साथ में विकसित देश है

आज यदि भारत के लोगो को यदि कोई, आत्मा, परमात्मा चमत्कार, भूत का अस्तित्व के बारे कोई कह रहा हो, तो जल्दी से उनके दिमाग मे उतरने लगता है। लेकिन इसके विपरीत कोई कुछ कह रहा है, तो उल्टा उसे पागल करार कर दिया जाता है ।

दोस्तो ऐसा क्यों होता है?

इसका जवाब ये है कि बचपन से होनेवाले हमारे मन पर आस्तिक संस्कार ।

स्कूल हो, या घर हो, थीएटर हो हर तरफ दैवीय शक्ति को बचपन से हमारे कच्चे मन मे बिठा दि जाती है।

ऐसे संस्कारो मे हम पलते है, बडे होते है और अपने अंतर्मन मे पक्का बैठ जाता है कि भगवान का अस्तित्व है , शैतान भी है ।उसे नकारने के लिए मन तैयार नही हो पाता। इसलिए आपने उन लोगो के सामने कितना भी माथा पीटे, तो भी वे यही कहेंगे कि भगवान है ।

आज भी टी.वी सिरीयल मे अंधविश्वास ,काल्पनिक बातो के अतिरिक्त और कुछ भी नही दिखाया जाता।
इसलिए आज से ही अपने बच्चो पर विज्ञानवादी संस्कार दो ताकि वे अंधविश्वास के जाल मे न फसे और खुद के फैसले खुद लेने लगेंगे किसी दैवीय शक्ति पर इसके लिए निर्भर न रहे ।

● बचपन मे माअ कहती है उधर मत जाना वर्ना भूत आ जाएगा. . .

● बचपन मे मा बताती है भगवान के सामने हाथ जोडकर बोल ‘भगवान मुझे पास कर दो ‘।

● टीवी पर कार्टून मे चमत्कार, जादू जैसी अवैज्ञानिक बाते दिखाकर बच्चो का मनोरंजन किया जाता है, लेकिन चमत्कार और जादू की बच्चो के अन्तर्मन मेें गहराई तक असर होता है और बड़े होने के बाद भी इंसान के मन मे चमत्कार और जादू के लिए आकर्षण कायम रहता है ।

● स्कूल मे जो विज्ञान सिखाया जाता है उसका संबंध रोजमर्रा की जिंदगी से न जोड़ना ।

● Law Of Monopoly मतलब 99% समाज के लोग इसी राह पर चल रहे है तो जरूर वे सही ही होंगे, हमने उनका अनुकरण करणा चाहिये ये समझ।

● इंसानी जीवन भाव भावनाओ का और उलझा होने के कारण उसमे असीम सुख और दुख की विस्मयकारक शाॅकिंग मिलावट है, जो बाते उसे हिलाकर रख देती है और उसका चमत्कारो पर यकीन पक्का होता जाता है ।

● हमने ये किया इसलिये ऐसा हुआ और हमने ऐसा नहीं किया इसलिए हमारे साथ वैसा कुछ हुआ है ।ऐसी कुछ योगायोग की घटनाओ को इंसान नियम समझकर जीवन भर उसका बोझ उठाता रहता है ।

●Law Of Repeated Audio Visual Effect- इस तत्व के अनुसार समाज मे मिडिया, माउथ पब्लिसिटी, सामाजिक उत्सव इत्यादि माध्यम से जो इंसान को बारबार दिखाया जाता है, सुनाया जाता है उसपर इंसान आसानी से यकीन कर लेता है ।

● ‘डर ‘ और ‘ लोभ ‘ ये दो नैसर्गिक भावनाए हर इंसान के भीतर बडे तौर पर होती है, लेकिन जिस दिन ये भावनाए इंसान के जीवन पर प्रभुत्व प्रस्थापित करती है तब वह मानसिक गुलामगिरी मे फसता जाता है ।

● और अंत मे सभी मे महत्वपूर्ण बात ‘चमत्कार’ होता है ऐसा सौ बार आग्रह से बताने वाले सभी धर्म के ग्रंथ इस बात की वजह है ।इसलिए धर्म ग्रंथ मे बतायी गयी अतिरंजित बाते कैसे गलत है, ये वक्त रहते ही बच्चो को समझाने की कोशिश करे ।

भारत अंधविश्वास मुक्त करो

भारत महासत्ता बनेगा

प्रस्तुतकर्ता : सिकन्दर कुमार मेहता

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आज भी मनाई जाती हैं ऐसी अजीब परंपराएं, जानकर हैरान हो जाएंगे आप

संपूर्ण विश्व में अलग-अलग संप्रदाय, धर्म और संस्कृति को मानने वाले लोग हैं और सभी धर्मों में अपने-अपने रीति रिवाज भी होते हैं।

मल्टीमीडिया डेस्क। संपूर्ण विश्व में अलग-अलग संप्रदाय, धर्म और संस्कृति को मानने वाले लोग हैं और सभी धर्मों में अपने-अपने रीति रिवाज भी होते हैं। कुछ रिवाज तो ऐसे भी होते हैं जो अजीब होने के साथ मानवीय संवेदना विचलित करने वाले होते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी ही अजीब रीति रिवाजों के बारें में बताने जा रहे हैं जो कि विश्व के विभिन्न भागो में मनाई जाती है।

मृतक के केश, चीन-

चीन के मिआओ जनजाति में यह परंपरा बहुत ही अजीब प्रकार से मनाई जाती है। इस जनजाति में अब केवल 5000 लोग ही शेष बचे हैं। इसके बाद भी यह अपने परंपराओं को मनाने में कोई कोताही नहीं करते हैं। इस अलौकिक परंपरा में यह जनजाति मरे हुए लोगों के केशों को उनके शरीर से निकाल कर उससे विग की बुनाई की जाती है। इसके अलावा भी इस जनजाति की महिलाएं बालों में कंघी करते समय निकले बालों को भी संभालकर रखती हैं और इसकी सहायता से विग का निर्माण करती हैं।

पूर्वजों के बालों से बनाए गये इस विग को विशेष त्योहारों के मौके पर श्रृंगार के रूप में पहना जाता है। हालांकि इस जनजाति में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के बालों का विग मिलता है। क्योंकि उनके केश ज्यादा होते हैं।

मृत शरीर के आस पास नृत्य करना, मेडागास्कर-

मेडागास्‍कर में एक अलग ही रिवाज है। मेडागास्‍कर में आदमी के मरने के बार त्‍योहार जैसा माहौल होता है। यहां के परिवार एक अजीब रस्‍म फामाडिहाना (टर्निग ऑफ द बोन्स) मनाते हैं। इस रस्‍म में लोग कब्र से लाश को फिर से निकाल उनकी शव यात्रा निकालते हैं। इस दौरान नए कपड़े पहने जाते हैं। शव को भी एक नए साफ कपड़े में लपेटते हैं और फिर उसके साथ ही नाचते-गाते हैं। नाच-गाने के लिए तेज संगीत भी बजाया जाता है। जानवरों की बलि दी जाती है और मेहमानों व परिवारजनों के बीच मांसाहारी भोजन बांटा जाता है।

मृतकों की राख खाना, अमेजन-

मृतकों की राख खाने की यह अजीब परंपरा अमेजन वर्षावन में रहने वाले योनोमी जनजाति द्वारा प्रचलित है। योनोमी लोगों का मानना है कि इनके संप्रदाय के लोगों की मौत स्वाभाविक रूप से नहीं होती बल्कि इसके बजाय दुश्मन जनजाति के जादूगर द्वारा भेजी एक बुरी आत्मा के कारण होती है। उनका विश्वास है कि यह आत्मा समुदाय में किसी व्यक्ति की मृत्यु का बदला लेने के लिए आती है। इसलिए, मृतक के समुदाय में प्रियजनों का अंतिम संस्कार से 30 से 45 दिनों के बाद एक समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी रिश्तेदार उनके अस्थियों से बने सूप में मृतक की राख डालकर पीना पड़ता है।

दुल्हन का अपहरण, किर्गिस्तान-

यह एक अजीब परंपरा है जो अभी भी किर्गिस्तान, मोल्दोवा और चेचन्या जैसे क्षेत्रों में जारी है। इस परंपरा में जो भी व्यक्ति किसी लड़की से विवाह करना चाहता है वह अपने मित्रों की मदद से उक्त लड़की का अपहरण कर लेता है। वहां इसे कोई अपराध नहीं समझा जाता है क्योंकि इस परंपरा के अनुसार अपहरण के बाद लड़के तथा लड़की के परिवार के लोग इस विवाह को संपन्न कराते हैं। यह यहां की एक सामान्य परंपरा है जो वर्षों से चली आ रही है।

बच्ची को उपर उछालना, कर्नाटक-

आज भी कर्नाटक के कुछ भागों में यह विवादित परंपरा को मनाया जाता है। इसमें 2 वर्ष से छोटी लड़की को लगभग 30 फीट की उंचाई से मंदिर के गुंबद तक उछाला जाता है। इसके बाद एक कंबल की मदद से लड़की को नीचे खड़े लोगों के द्वारा पकड़ लिया जाता है। हालांकि लड़की को सुरक्षित रोक लिया जाता है लेकिन उम्र को देखकर ऐसा करना खतरे से खाली नहीं है।

स्रोत : नई दुनिया

प्रस्तुतकर्ता : सिकन्दर कुमार मेहता

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[Must Read] : If Sita Was A Feminist

If Sita Was A Feminist

Kusha: Mom, who was our father? We would like to know about him.

Sita: Well, sons. Your father’s name is Ram. You might have heard about him, he is presently the king.

Lava: Damn, of course. Whatever are we doing here then? Shouldn’t we be living in the palace along with him?

Sita: Sons, that’s a long story and quite frankly very boring. So I’ll just give you the TL;DR version.
Your father used to be my knight in shining armor. Post a ceremony he won me and married me. Don’t be so shocked, dear sons, he literally did win me after a competition. Anyhow, post that I went to his place and was fulfilling all the duties expected of a wife in this patriarchal society. But mother in law got us banished to the forest.

Lava: That’s so wrong! Why didn’t you protest!?

Sita: Oh well, back then I was trying to be the good obedient wife. But, that wasn’t the worst. Lakshman tried to force me into moralistic boundaries and restricted my movements under the pretext of my protection. Ravana came as a disguised sadhu and I felt like helping. I was kidnapped and after a massive war, your father came and rescued me.

Kusha: Wow mom. That’s heroic of him. I don’t understand what all the fuss is about.

Sita: Sons, I haven’t yet come to the meatiest part yet. So after rescuing me, your daddy dearest and my knight in shining armor suspected me of sleeping with Ravana. He then asked me to ‘prove my purity’ by jumping in a fire. That was a very torturous and embarrassing episode!

Lava: What the hell, that wasn’t your fault. You were kidnapped! Why would he do that to you!. Shouldn’t he be trusting you as your husband?

Sita: Well he didn’t trust me. Despite the fact that I had an opportunity of escaping from Ravana earlier through one of your father’s deputies, Hanuman. I refused to go along with him because I did not want anyone else to touch me.

Kusha: Oh mother! You did so much and this is how you were treated! Our father seems like one big douchebag.

Sita: Yep, such is life my boys. Anyway, we all went back and your father was crowned the king. It was supposed to be a happily ever after ending, but when I got pregnant and was expecting you both, there was a rumor in the kingdom that I’m apparently impure. That I have a loose character. So to save his own image and honor, your father banished me to the forest. I didn’t protest, I had decided that it was enough of humiliation. I had no wish to live with a prick who is just bothered about what his subjects gossip and not worried about his pregnant wife at all.

Lava: Mom, that’s downright disgusting.

Sita: Yes, I know. Your great father didn’t even have the courtesy to drop me by himself. He sent your uncle Lakshman who later while dropping me off said that he’s undertaking this task with the heaviest of hearts.

Lava: Yeah right. That sounds like a load of bullshit.

Yep, I know. Not that I believed him. If your uncle was so concerned then he would have done something other than dropping off a pregnant lady in the forest to live alone. But as I said, I had enough and since then I have been living alone and couldn’t be happier.

Lava and Kusha: You are a brave woman, mom. Of course we do not need a misogynistic man like our father in our lives. We are better off without him. We are proud to have you as our mother. Now, shall we go out and practice archery?

Sita: Yes, go ahead. Have a nice time.

Brought To You By : Sikandar Kumar Mehta

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भारतीयों व विदेशियों द्वारा किया गया खोज/निर्माण

विदेशियों द्वारा की गई खोज/निर्माण

1. मोबाइल फोन
2. Facebook
3. WhatsApp
4. Email
5. Fan (पंखा)
6. जहाज
7. रेलगाड़ी
8. रेडियो
9. टेलीविजन
10. कम्प्यूटर
11. चीप (Memory Card)
12. कागज
13. प्रिंटर
14. वाशिंग मशीन
15. AC
16. फ्रीज
17. संविधान
18. चंद्रमा
19. ग्रह
20. पृथ्वी की आकृति
21. दूरबीन
22. सैटेलाइट
23. चुम्बक
24. घर्षण, गुरुत्वाकर्षण, न्यूटन के नियम
25. रोबोट
26. मैट्रो रेल
27. बुलेट ट्रेन
28. परमाणु बम, हाइड्रोजन बम
29. जल में अणु
30. बैंक का निर्माण

आदि-आदि और भी न जाने कितने ही ऐसे कार्य जिनकी शुरुआत विदेशों से हुई जिनको फॉलो करते हुए अन्य देश तरक्की की राह पर अग्रसर है!

भारतीयों की खोज/निर्माण

1. भूत-प्रेत
2. राक्षस/ चुड़ैल
3. आत्मा
4. आध्यात्मिक शक्ति
5. अनेक देवी-देवता जिनकी अलग-अलग दिन पूजा
6. सभी देवी-देवताओं के पास अलग-अलग प्रकार की शक्ति जैसे :- अनाज की देवी, धन की देवी, शिक्षा की देवी, मजदूर(कामगार) की देवी, भूत-प्रेत से बचाने वाले देवी-देवता, ग्रहों की दिशा बदलने वाले/प्रकोप दूर करने वाले आदि
7.अनेक व्रत/उपवास
8. सर्वाधिक मंदिरों का निर्माण
9. सर्वाधिक आध्यात्मिक गुरु
10. मंत्र/उपवास से इलाज करने वाले डाक्टर
11. मन चाहा प्यार, नौकरी, व्यापार में घाटा, गृह क्लेश, वशीकरण आदि का समाधान
12. शिक्षा में विज्ञान एवं महापुरुषों के योगदान की जगह आध्यात्मिक (गीता) शिक्षा
13. बाल विवाह
14. सती प्रथा
15. जाति वर्ग
16. शिक्षा, व्यापार का एकाधिकार
17. वैज्ञानिकता को आध्यात्मिकता से जोड़ना
18. मानव जाति का मुख्य वर्ग स्त्री को अधिकार देने पर हंगामा
19. आदि-आदि

प्रस्तुतकर्ता : सिकन्दर कुमार मेहता

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अरे ये क्या! महिलाओं ने डस्टबिन को भगवान समझ की पूजा, वायरल हुआ VIDEO

भारत में लोग भगवान के साथ-साथ पेड़ों, जानवरों आदि कई की पूजा करते हैं लेकिन क्या आपने किसी को डस्टबिन की पूजा करते हुए देखा है?

हाल ही में सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें यूजर्स महिलाओं द्वारा डस्टबिन की पूजा करने का दावा कर रहे हैं।

वीडियो के अनुसार, कुछ महिलाएं एक मंदिर में कंगारू की तरह दिखने वाली डस्टबिन की पूजा करती हैं। महिलाएं डस्टबिन की पूजा करने के दौरान उस पर फूल और जल चढ़ाती हुई दिख रही हैं। डस्टबिन का रंग पीला दिख रहा है।

वीडियो में मंदिर से घंटे बजने की आवाजें भी सुनाई देती हैं। इस वीडियो को कई फेसबुक यूजर्स ने अपनी वॉल पर पोस्ट किया है। इसी तरह एक फेसबुक यूजर ने वीडियो पोस्ट किया तो लोग तरह तरह के कमेंट करने लगे। एक यूजर ने लिखा कि महिलाओं ने कंगारू को चूहा समझ लिया होगा।

वीडियो

प्रस्तुतकर्ता : सिकन्दर कुमार मेहता

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