तुगलकी फरमान

Sikandar Kumar Mehta

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अखिल भारत हिंदू महासभा ने एक बार फिर तुगलकी फरमान जारी किया है।
हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष धर्मपाल सिवाच ने कहा कि समाज में बढ़ती अश्लीलता को रोकने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में ‘ड्रेस कोड’ लागू किया जाए।धर्मपाल ने कहा कि लड़कियों के जींस, टॉप पहनने और मुंह पर दुपट्टा बांध कर स्कूटी एवं बाइकचलाने पर बैन लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि ‘लिव इन रिलेशनशिप’पर भी पूरी तरह से बैन लगाकर इसके खिलाफ कानून बनाया जाए।उन्होंने यहां कहा कि अभी हमारा परिवेश ऐसा नहीं है कि लड़के-लड़कियों को खुली छूट दी जाए। कपड़े हमेशा वही पहनने चाहिए, जिससे पूरा शरीर ढंका हुआ हो। अश्लील कपड़ों से अश्लीलता बढ़ती है। घर्मपाल ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में जाने वाली लड़कियों के गले में चुन्नीहोनी चाहिए क्योंकि यह हमारी संस्कृति का प्रतीक है।
सिवाच ने कहा कि लडकियां मल्टिमीडिया फोन रखती हैं और इसमें सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अश्लील चित्र आते रहते हैं। इसलिए कॉलेज के समय लड़के-लड़कियों पर मल्टीमीडिया फोन रखने पर बैन लगना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में एक लाख हिंदू महासभा के सदस्य बनानेका लक्ष्य रखा गया है। इस मुहिम का हरियाणा के बुद्धिजीवियों और कई सम्मानित खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी समर्थन किया है, उनके समर्थन देने से महासभा को काफी बल मिला है।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर अमल के लिए राज्य स्तरीय हिंदू महासभा की बैठक सात दिसंबर को होगी।
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टोनही अंधविश्वास ने दस साल में ली 200 जान

Sikandar Kumar Mehta

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छत्तीसगढ़ में टोनही का कहर लगातार जारी है। पिछले दस साल में टोनही प्रताड़नामें लगभग 200 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बैगा और झाड़फूंक करने वाले महिलाओं को टोनही बता रहे हैं और परिवार के सदस्य ही उनकी बेरहमी से हत्या कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में टोनही प्रताड़ना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2005 में नया कानून बनाया, लेकिन टोनही निवारण अधिनियम का असर देखने को नहीं मिल रहा है। पिछले पांच महीने में दो दर्जन से ज्यादा टोनही के मामले दर्ज हुए, इसमें छह महिलाओं की हत्या कर दी गई।

जिला-मामला
जांजगीर-चांपा-124
बलरामपुर-121
कोरिया-109
जशपुर-91
राजनांदगांव-81
सूरजपुर-75
कवर्धा-68
दुर्ग-65
बिलासपुर-65
सरगुजा-63
रायगढ़-70
कोरबा-34
बालोद-31
गरियाबंद-20
जगदलपुर-19
कांकेर-15
बालोद-13
मुंगेली-12
धमतरी-10
बेमेतरा-7
नारायणपुर-3

(आरटीआई में 2001 से 2012 तक की जानकारी के अनुसार।)
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क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है ?

Sikandar Kumar Mehta
1971 में रायबरेली से इंदिरा गांधी ने राजनारायण को हराया था. जयप्रकाश नारायण के सबसे ताकतवर साथियों में एक राजनारायण ने इंदिरा गांधी को चुनाव में कड़ी चुनौती दी थी, लेकिन वे हार गए थे. इसके चार साल बाद चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे रद्द करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. न्यायालय ने चुनाव रद्द कर दिया. इसके बाद ही 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया था.
अब जिस वाराणासी संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी ने 371784 वोटों से जीत हासिल की है, वहां 311057 फर्जी वोटर मिले हैं. अभी गिनती जारी है और जिला प्रशासन का अनुमान है कि फर्जी वोटरों की संख्या 647085 जा सकती है. इतनी बड़ी संख्या में फर्जी वोटर पहली बार वाराणसी में सामने आए हैं. लाखों की तादाद में मिले फर्जी वोटरों का खुलासा तब हुआ जब भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मतदाता सूची का पुनरीक्षण अभियान शुरू किया. जिले केसभी पोलिंग सेंटर पर तैनात बूथ लेवल ऑफिसर से घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करवाने के बाद इन बोगस वोटरों का खुलासा हुआ है.
मुझे मालूम है कि सच क्या है ?
पर ये खबरें प्रशासन के हवाले से आ रही हैं। इसका नतीजा क्या होगा,
यह देखना दिलचस्प होगा.
पूरी खबर यहाँ पढ़ें:
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Andheri Nagri Choupat Raja

Sikandar Kumar Mehta
देश का प्रधानमंत्री जेनेटिक साइंस और प्लास्टिक सर्जरी के लिए कर्ण और गणेश का उदाहरण देता है!
शिक्षा मंत्री हाथ और कुंडली दिखाकर भविष्य पूछने ज्योतिषी के पास जाती है!
जल-संसाधन मंत्री अंग्रेजी को संस्कृत से रिप्लेस करने की बात करती है!
सरकारी इतिहासकार हवाई जहाज और एटोमिक पॉवर की खोज और आविष्कार यहाँ बताते हैं!
Z सुरक्षा प्राप्त सरकार के शुभचिंतक सहयोगी योग-गुरु कैंसर, एड्स और इबोला का इलाज योग से करने का दावा करते हैं!
इस सरकार के सरपरस्त, हिन्दू राष्ट्र का सपना देखने वाले और हिन्दू संस्थाओं के मुखिया देश में 800 साल बाद हिन्दू सरकार होनेका स्वागत करते हैं!
संघ प्रचारक बत्रा देश के मासूमों के दिमाग में भ्रम और जहर भरने के लिए इतिहास को बदलकर शिक्षा का भगवाकरण करने की योजना, संघ की सरपरस्ती में चलने वाली सरकार के साथ मिलकर बनाते हैं!अन्तर्राष्ट्रीयमीडिया इन सब बातों को लेकर हमारे देश का मजाक उड़ाता है!हमारे विदेशी मित्र इन सब अन्धविश्वास से भरी और मूर्खतापूर्ण बातों को सुनकर हँसते हैं!हमें शर्म आती है और कष्ट होता है कि हमारे देश और बच्चों का भविष्य किन लोगों के हाथों में दे दिया गया है!
मीडिया को खरीद लेने वाली गरीब विरोधी अम्बानी-अडानी की कठपुतली सरकार, धन-पशुओं की तिजोरी भरने में लगी रहती है!धर्मांध, कट्टर और व्यक्ति-पूजक लोग तो इनकी भक्ति करेंगे ही परन्तु जब पढ़े-लिखे समझदार खुद को प्रगतिशील और आधुनिक कहने वाले लोग इनके अंधभक्त बनकर इनकी प्रशंसा करते हैं तो आश्चर्य होता है!
इस सरकार को वोट देने वाले 31% लोगों, तुम्हें आने वाली पीढ़ी कभी माफ़ नहीं करेगी!
Via – Swami Balendu

मैं नास्तिक क्यूं ह

Sikandar Kumar Mehta
23 मार्च को भगत सिंह की शहादत केदिन हर साल उन्हें याद किया जाता है लेकिन कम लोग जानते हैं कि घंटों तक गायत्री मंत्र का जाप करने वाले भगत सिंह अपने अध्ययन के चलते नास्तिक हो गए थे। जेल में रहने के दौरान लिखा गया उनका लंबा लेख ‘मैं नास्तिक क्यूं हूं’बहुत लोकप्रिय हुआ था। इसे कई बार छोटी किताबों की शक्ल में उतारा गया
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रामपाल के बाद अब राम रहीम मुश्किल में

Sikandar Kumar Mehta

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लगता है ‘खुद को ईश्वर’ बताने वाले बाबाओं के बुरे दिन चल रहे हैं.
विवादित ‘स्वयंभू गॉड’ रामपाल के बाद हरियाणा के ही एक और बाबा कोर्ट के निशाने पर आ गए हैं. सिरसा में डेरा जमाए सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ पंचकुला की सीबीआई कोर्ट ने शिकंजा कस दिया है. 15 नवंबर को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि राम रहीम के खिलाफ रेप और हत्या के मामलों की अलग-अलग सुनवाई होगी.राम रहीम के खिलाफ डेरा निवासी के यौन उत्पीड़न के मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 29 नवंबर को तय की. वहीं, दो हत्याओं के मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को होगी.
हालांकि राम रहीम इस दौरान सुनवाई के लिए कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, बल्कि सिरसा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.इससे पहले 14 नवंबर को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप, हत्या और कोर्ट की अवमानना के मामले में वांछित बाबाओं को कोर्ट में पेश करने के मामले में नाकाम हरियाणा सरकार को लताड़ लगाई थी. अक्टूबर महीने में कोर्ट ने राम रहीम के खिलाफ रेप और हत्या के मामले से जुड़े सारे दस्तावेज मांगे थे.
14 नवंबर को राम रहीम के खिलाफ ताजा याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस के. कन्नन ने कहा, ‘अदालतें बाबाओं के आदेश से नहीं चलती. फर्जी बाबा लोग अपने आपको समझते क्या हैं? उन्हें पता होना चाहिए कि भगवान कृष्ण ने भी कुछ समय जेल में बिताया था. अदालतों को न्यायाधीश चलाते हैं, बाबा नहीं.
‘गौरतलब है कि साल 2002 में राम रहीम के दो भक्तों ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर राम रहीम के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया था. इसके बाद कोर्ट ने सितंबर 2002 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था, इस मामले में 30 जुलाई 2007 को चार्जशीट फाइल हुईथी.राम रहीम पर चौटाला का हमलाउधर, हरियाणा के नेता विपक्ष और इनेलो लीडर अभय चौटाला ने विधानसभा चुनाव में बीजेपी का समर्थन करने वाले राम रहीम के खिलाफ जंग छेड़ दी है. गुरुवार कोसोनीपत में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चौटाला ने कहा, ‘डेरा के समर्थन ने हरियाणा में राजनीतिक समीकरण बदल दिए और इनेलो को इसकी कीमत चुकानी पड़ी.

‘चौटाला ने कहा, ‘इनेलो का रास्ता रोकने वाला बाबा बच नहीं सकता. एकबाबा जेल चला गया, दूसरा भी उसी के रास्ते पर जाएगा. बीजेपी भी उसे बचा नहीं पाएगी.’

आरक्षण क्यों ?

Sikandar Kumar Mehta

जब बात आरक्षण की होती है तो सब भारतीय संविधान द्वारा अनुसूचित-जाती, जनजाति एवं अतिपिछड़ा वर्ग को मिले उस आरक्षण या विशेष अधिकारों की ही बात करतें हैं जिन्हें लागू हुए मुश्किल से 64 वर्ष ही हुए हैं ,कोई उस आरक्षण की बात नही करता जो पिछले 3000 वर्षों से भारतीय समाज में लागू थी

जिसके कारण ही इस आरक्षण को लागू करने की आवश्यकता पड़ी आज ”भारतीय गणराज्य का संविधान” नामक संविधान, जिसका हम पालन कर रहें है जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ उससे पहले जो संविधान इस देश में लागू था जिसका पालन सभी राजा-महाराजा बड़ी ईमानदारी से करते थे उस संविधान का नाम था ”मनुस्मृति”

आधुनिक संविधान के निर्माता अंबेडकर ने सबसे पहले 25 दिसंबर 1927 को हज़ारों लोगों के सामने इस ”मनुस्मृति” नामक संविधान को जला दिया ,क्यूंकी अब इस संविधान की कोई आवश्यकता नही थी भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान इसलिए दिया गया क्यूंकी इस देश की 85 प्रतिशत शूद्र जनसंख्या को कोई भी मौलिक अधिकार तक प्राप्त नही था

,सार्वजनिक जगहों पर ये नही जा सकते थे मंदिर में इनका प्रवेश निषिध था सरकारी नौकरियाँ इनके लिए नहीं थी , ये कोई व्यापार नही कर सकते थे , पढ़ नहीं सकते थे , किसी पर मुक़दमा नही कर सकते थे , धन जमा करना इनके लिए अपराध था , ये लोग टूटी फूटी झोपड़ियों में, बदबूदार जगहों पर, किसी तरह अपनी जिंदगिओं को घसीटते हुए काट रहे थे और यह सब ”मनुस्मृति” और दूसरे हिंदू धर्मशास्त्रों के कारण ही हो रहा था कुछ उदाहरण देखिए-
1.संसार में जो कुछ भी है सब ब्राह्मानो के लिए ही है क्यूंकी वो जन्म से ही श्रेष्ठ है(मनुस्मृति 1/100)

2.स्वामी के द्वारा छोड़ा गया शूद्र भी दासत्व से मुक्त नही क्यूंकी यह उसका कर्म है जिससे उसे कोई नही छुड़ा सकता (8/413)

3.यदि कोई नीची जाती का व्यक्ति ऊँची जाती का कर्म अपना ले तो राजा उसे देश निकाला देदे (10/95)

4.बिल्ली, नेवला चिड़िया मेंढक, गढ़ा, उल्लू, और कौवे की हत्या में जितना पाप लगता है उतना ही पाप शूद्र (अनुसूचितजाती, जनजाति एवं अतिपिछड़ा वर्ग) की हत्या में है (मनुस्मृति 11/131)

5.शूद्र का धन ब्राह्मण निर्भीक होकर छीन सकता है क्यूंकी उसको धन रखने का अधिकार नही (8/416)

6. सब वर्णों की सेवा करना ही शूद्रो का स्वाभाविक कर्तव्य है (गीता,18/44)

7. जो अच्छे कर्म करतें हैं वे ब्राह्मण ,क्षत्रिय वश्य, इन टीन अच्छी जातियों को प्राप्त होते हैं जो बुरे कर्म करते हैं वो कुत्ते, सूअर, या शूद्र जाती को प्राप्त होते हैं (छान्दोन्ग्य उपनिषद् ,5/10/7)

8. पूजिए विप्र ग्यान गुण हीना, शूद्र ना पूजिए ग्यान प्रवीना,(रामचरित मानस)

9.ब्राह्मण दुश्चरित्र भी पूज्‍यनीए है और शूद्र जितेन्द्रीए होने पर भी तरास्कार योग्य है (पराशर स्मृति 8/33)

10. धार्मिक मनुष्या इन नीच जाती वालों के साथ बातचीत ना करें उन्हें ना देखें (मनुस्मृति 10/52)

11. धोबी , नई बधाई कुम्हार, नट, चंडाल, दास चामर, भाट, भील, इन पर नज़र पद जाए तो सूर्य की ओर देखना चाहिए इनसे बातचीत हो जाए तो स्नान करना चाहिए (व्यास स्मृति 1/11-13)

12. अगर कोई शूद्र वेद मंत्र सुन ले तो उसके कान में धातु पिघला कर डाल देना चाहिए- गौतम धर्म सूत्र 2/3/4….
ये उन असंख्य नियम क़ानूनों के उदाहरण मात्र थे, जो आज़ाद भारत से पहले देश में लागू थे ये अँग्रेज़ों के बनाए क़ानून नहीं थे ये हिंदू धर्म द्वारा बनाए क़ानून थे जिसका सभी हिंदू राजा पालन करते थे प्रारंभ में तो इन्हें सख्ती लागू करवाने के लिए सभी राजाओं के ब्राह्मणों की देख रेख में एक विशेष दल भी हुआ करता था

इन्ही नियमों के फलस्वरूप भारत में यहाँ की विशाल जनसमूह के लिए उन्नति के सभी दरवाजे बंद कर दिए गये या इनके कारण बंद हो गये, सभी अधिकार, या विशेष-अधिकार, संसाधन, एवं सुविधायें कुछ लोगों के हाथ में ही सिमट कर रह गईं, जिसके परिणाम स्वरूप भारत गुलाम हुआ ,
भारत की इस गुलामी ने उन करोड़ों लोगों को आज़ादी का अवसर प्रदान किया जो यहाँ शूद्र बना दिए गये थे , इस तरह धर्मांतरण का सिलसिला शुरू हुआ , बड़ी संख्या में लोगों ने इस्लाम ईसाइयत को अंगीकार किया , अंग्रेज़ो के शासन काल में उन्नीस्वी सदी के प्रारंभ से यहाँ पुनर्जागरण काल का उदय हुआ जिसके नायक यहीं के उच्च वर्गिए लोग थे जो अँग्रेज़ी शिक्षा, संस्कृति से प्रभावित हो कर देश में बदलाव लाने को प्रयत्नशील हुए ,

सती प्रथा को समाप्त किया गया स्त्री शिक्षा के द्वार खोले गये , शूड्रों को नौकरियों में स्थान दिया जाने लगा और कितनी ही क्रूर प्रताओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया ,कई परिवर्थन्शील ,संगठनों का उदय हुआ ऐसे ही समय में अंबेडकर का जन्म हुआ , समाज में कई परिवर्तन हुए थे परंतु अभी भी शूड्रों के जीवन पर इसका कोई …

अम्बेडकर का जीवन संघर्ष इस बात का उदहारण है , अम्बेडकर अपने समय के विश्व के पांच सबसे बड़े विद्वानों में से एक थे ,अपने जीवन के कड़े अनुभवों को ध्यान में रखकर उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सदियों से हिन्दू धर्म द्वारा दलित, उत्पीडित बहुसंख्य जनों के उत्थान को समर्पित करते हुए लम्बे संघर्ष में लगा दिया , जिस कारण दुनिया को पहली बार भारत के इस महान अभिशाप का ज्ञान हुआ और पशुओं का जीवन व्यतीत कर रहे उन करोड़ों लोगों को स्वाभिमान से जीवन जीने की ललक पैदा हुई , उन्होंने अपने जीवन के कीमती कई वर्ष हिन्दू समाज, हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति और हिन्दू धर्म शाश्त्रों के अध्ययन में लगाये ,
अम्बेडकर के प्रयासों का ही नतीजा था की भारत के राजनैतिक और सामाजिक स्थिति का विश्लेषण करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सात सदस्सिए साइमन कमीशन को भारत भेजा जिसका अम्बेडकर ने स्वागत किया लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिस्कार कर दिया, और कांग्रेस वर्किंग कमिटी द्वारा १९२८ में नए संविधान की रूप रेखा तैयार की गई जिसके लिए सभी धर्म एवं सम्प्रदायों को बुलाया बुलाया गया लेकिन अम्बेडकर को इससे दूर रखा गया

१२ से १९ जनवरी १९३१ को गोलमेज की प्रथम कांफ्रेंस में पहली बार देश से बाहर अम्बेडकर ने अपने विचार रखे , और शूद्रो की सही तस्वीर पेश की इसी कांफ्रेंस में उन्होंने कानून के शाशन और शारीरिक ताकत की जगह संवैधानिक अनुशाशन की प्रतिष्ठा का दावा किया , सम्मलेन में जो ९ सब कमिटी बनी उन सभी में उन्हें सदस्य बना लिया गया , उनकी योग्यता उनके सारपूर्ण वक्तव्यों की वजह से यह संभव हो पाया, फ्रेंचाइजी कमिटी में उन्होंने दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र की मांग की और उनकी सभी मांगों को अंग्रेजी सरकार को मानना पड़ा

अम्बेडकर की इस अभूतपूर्व सफलता ने कांग्रेस की नींद हराम कर दी क्यूंकि सवर्णों की इस पार्टी को डर हुआ की सदियों से जिन्हें लातों तले दबा के रखा , उनसे अपने सभी गंदे से गंदे काम करवाए, अगर उन्हें सत्ता मिल गई तब तो हमारी आने वाली पीडिया बर्बाद हो जाएँगी , हमारा धर्म जो इनसे छीन कर हमें सारी सुविधाएं सदियों से देता आया है वो संकट में पड जायेगा , यही सब सोच कर कांग्रेस के इशारों पर गाँधी ने अम्बेडकर को मिले अधिकारों के विरूद्ध आमरण अनशन की नौटंकी शुरू कर दी , जिसके कारण अंत में राष्ट्र के दबाव में आकर अम्बेडकर को “POONA – PACT ” पर हस्ताक्षर करने पड़े जिसके अनुसार अग्रिम संविधान बनाने का मौका अम्बेडकर को दिया जाना तय हुआ बदले में अम्बेडकर को गोलमेज में मिले अपने सभी अधिकारों को छोड़ना पड़ा

इस तरह वर्तमान संविधान का जो की मजबूरी में बना आधारशिला तैयार हुई जिसमें उन्होंने आरक्षण का प्रावधान डाला और दलितों के लिए सभी कानून बनाये अब जरा थोड़ी देर के लिए यह कल्पना कीजिये की अगर अम्बेडकर दलितों के लिए १०० प्रतिशत आरक्षण की मांग करते जो की उनका हक़ है तो क्या होता , परन्तु अम्बेडकर ने ऐसा नहीं किया ,
आज जब सरकारी नौकरियां वैश्वीकरण के नाम पर पूरे षड्यंत्र करी तरीके से समाप्त की जा रहीं हैं , ऐसे में शूद्र एक बार फिर हाशिये पर आगया है ,ऐसे में ये कहना की बचे खुचे आरक्षण को भी समाप्त कर दिया जाये एक बार फिर से शूद्र को गुलाम बनाने की सोची समझी साजिश ही तो है

आज जितने शूद्र (SC,St,Obc,)अम्बेडकर के प्रावधानों के कारण सरकारी नौकरियों तक पहुचे हैं और सुख से दो जून की रोटी खा रहे हैं , उससे कहीं अधिक ब्रह्माण आज भी हिन्दू धर्म शाश्त्रों के सदियों पुराने प्रावधानों के कारण देश के लाखों मंदिरों में पुजारी बन अरबों-खरबों के वारे न्यारे कर रहे हैं और देश की खरबों की संपत्ति पर कब्ज़ा जमाये बैठे हैं क्या किसी ने इस आरक्षण को समाप्त करने की बात की….?

क्या किसी ने आज भी दलितों पर होने वालें अत्याचारों को रोकने के लिए आमरण अनशन किया ?

क्या किसी ने मिर्च पुर, गोहाना, खैरलांजी,झज्जर,के आरोपियों के लिए फांसी की मांग की ?

क्यूँ नहीं पहले ब्रह्माण क्षत्रिय और वैश्य अपने अपने जातीय पहचानों को समाप्त करते ?

जाती स्वयं नष्ट हो जाएगी

जाती नष्ट होते ही आरक्षण की समस्या सदा के लिए नष्ट हो जाएगी ,

ऊपर की जाती वाले क्यूँ नहीं अपने बच्चों की शादियाँ शूद्रोंं के बच्चों संग करने की पहल करते ?

लेकिन यहाँ तो बात ही दूसरी है इनके बच्चे अगर दलितों में प्रेम विवाह करना चाहें तो ये उनका क़त्ल कर देते हैं धन्य है