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टोनही अंधविश्वास ने दस साल में ली 200 जान

Sikandar Kumar Mehta

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छत्तीसगढ़ में टोनही का कहर लगातार जारी है। पिछले दस साल में टोनही प्रताड़नामें लगभग 200 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बैगा और झाड़फूंक करने वाले महिलाओं को टोनही बता रहे हैं और परिवार के सदस्य ही उनकी बेरहमी से हत्या कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में टोनही प्रताड़ना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2005 में नया कानून बनाया, लेकिन टोनही निवारण अधिनियम का असर देखने को नहीं मिल रहा है। पिछले पांच महीने में दो दर्जन से ज्यादा टोनही के मामले दर्ज हुए, इसमें छह महिलाओं की हत्या कर दी गई।

जिला-मामला
जांजगीर-चांपा-124
बलरामपुर-121
कोरिया-109
जशपुर-91
राजनांदगांव-81
सूरजपुर-75
कवर्धा-68
दुर्ग-65
बिलासपुर-65
सरगुजा-63
रायगढ़-70
कोरबा-34
बालोद-31
गरियाबंद-20
जगदलपुर-19
कांकेर-15
बालोद-13
मुंगेली-12
धमतरी-10
बेमेतरा-7
नारायणपुर-3

(आरटीआई में 2001 से 2012 तक की जानकारी के अनुसार।)
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