Uncategorized

पाखंड का अंत -२

सिकन्दर कुमार मेहता
आज पड़ोस में हो रहे सतसंग-भजन कार्यक्रम समाप्त होने वाला है, उस साधु -बाबा से जब मैने पूछा कि अब तो जीवन में कोई कष्ट नहीं रह जाएगा ।
मेरा इतना कहतें ही वे आग-बबूला हो गएऔर कहा कि तुम्हें धर्म-कर्म पर विश्वास है या नहीं ?
मेरा नाकारात्मक जवाब सुनकर तो उनका पारा और गर्म हो गया ।
उसने अपने अन्धभक्तों को मुझसे दूर रहने को कहा और समाज के लिए खतरनाक बताया ।
समाज के लिए खतरनाक होऊं या नहीं पर आपके पाखंड के लिए जरूर खतरा हूँ – मैने कहा ।
खॆर, नास्तिकता भी कोई चीज है यह बहुतसे लोगों ने जाना, इसके लिए मैने उस ‪रामजादे‬का विन्रमतापूर्वक धन्यवाद दिया ।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s