ये तो पत्थर के बने हैं

सिकन्दर कुमार मेहता एक बच्चा अपनी माँ के साथ मंदिर गया । मन्दिर के मुख्य-द्वार  पर पत्थर से बने दो शेर को देख बच्चा रोने लगा और कहा कि वह काट लेगा । मां ने समझाया कि ये पत्थर के बने हैं, यह काट नहीं सकता । आगे बढ़ने पर वह पत्थर के बने दो …

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विरह-वेदना

सिकन्दर कुमार मेहता न जाने अब भी मुझे तू क्यों याद आती है, तुझसे बिछड़े तो हो गए बरषों । उस विरह की वेदना आज भी मुझे सताती है, न जाने अब भी मुझे तू क्यों याद आती है ॥ पास होता तो दूर जाने की कोशिश करती, दूर हूँ तो तू क्यूं तड़पती । …

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प्यार एक सुन्दर-सा धोखा

सिकन्दर कुमार मेहता वो सावन की रात, जब पेड़-पोधे तक सो रहे थे । कमरे की जलती दिए की लौ भी ऊंघने लगी थी, मगर प्यार में भ्रमित दिल क्यों रो रहा था ॥ स्याह सुरत के कारण शायद, तुमने मुझे छोड़ दिया । क्या तब सही में अन्धा था, जब पहली नजर में प्यार …

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चोर-चोर मौसेरा भाई

सिकन्दर कुमार मेहता गौतम अदानी को ऑस्ट्रेलिया मे कोयला उत्खनन का प्रोजेक्ट मिला लेकिन अदानी के इस प्रोजेक्ट के लिये अदानी को पैसा चाहिये था. अदानी ने The Royal Bank of Scotland,Deutsch Bank(German Bank) और HSBC bank जैसी बँको से लोन मांगा सबने मना कर दिया. अदानी Citigroup और JP Morgan Chase जैसी कम्पनियो के …

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अंधविश्वास पर कटाक्ष

सिकन्दर कुमार मेहता कोई भी मनुष्य सिर्फ मनुष्य हो सकता है,इससे उपर कुछ भी नहीं । उनमें किसी प्रकार की कोई भी साकारत्मक अथवा नकारात्मक शक्तियां पाने की सामर्थ्य नहीं हो सकती । मेरे इस सिधांत पर समाज में सम्मानीय स्थान पाने वाले गुणी-ओझा और नीच स्थान पाने वाले कथित डायन बराबर है । गुणी-ओझा …

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