ये तो पत्थर के बने हैं

सिकन्दर कुमार मेहता
एक बच्चा अपनी माँ के साथ मंदिर गया । मन्दिर के मुख्य-द्वार  पर पत्थर से बने दो शेर को देख बच्चा रोने लगा और कहा कि वह काट लेगा । मां ने समझाया कि ये पत्थर के बने हैं, यह काट नहीं सकता ।

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आगे बढ़ने पर वह पत्थर के बने दो मुस्टंडे द्वारपाल हाथ में भला लिए खड़ा था को देखा ।
बच्चा फिर रोने लगा और कहा कि यह मुझे मार देगा ।
माँ ने फिर समझाया कि ये पत्थर के बने है यह तम्हें नहीं मार सकता ।

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अब बच्चा मन्दिर के अंदर पहुंच गया ।
माँ ने फूल आरती मूर्ति पर चढ़ाने लगा ।
बच्चा – मां ये क्या कर रही हो ?
” देख नहीं रहे हो पूजा कर भगवान से कुछ मांग रही हूं “- माँ ने कहा ।

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बच्चे ने बड़ी मासूमियत से कहा की ये भी तो पत्थर के बने हैं यह कैसे कुछ दे सकता है ।

विरह-वेदना

सिकन्दर कुमार मेहता
न जाने अब भी मुझे तू क्यों याद आती है,
तुझसे बिछड़े तो हो गए बरषों ।
उस विरह की वेदना आज भी मुझे सताती है,
न जाने अब भी मुझे तू क्यों याद आती है ॥

पास होता तो दूर जाने की कोशिश करती,
दूर हूँ तो तू क्यूं तड़पती ।
क्या तुम्हारी भी ह्रदय कड़ाहती है ।
न जाने अब भी…..

फूल-सी कोमल हाथों का वो एहसास,
अब भी है मेरे दामन में ।
तेरे जिस्म की वो खुसबू आज भी मदहोस कर जाती है ,
न जाने अब भी…..

लौट आओ मेरे जिन्दगी में,
कब तक तड़पता रहूं ।
तेरी याद ने मुझ जैसे को भी शायर बना जाती है,
न जाने अब भी…..

(यह कविता मैने गत सप्ताह लिखा ।)

प्यार एक सुन्दर-सा धोखा

सिकन्दर कुमार मेहता

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वो सावन की रात,
जब पेड़-पोधे तक सो रहे थे ।
कमरे की जलती दिए की लौ भी ऊंघने लगी थी,
मगर प्यार में भ्रमित दिल क्यों रो रहा था ॥

स्याह सुरत के कारण शायद,
तुमने मुझे छोड़ दिया ।
क्या तब सही में अन्धा था,
जब पहली नजर में प्यार किया ॥

क्या दिल लगाने का था मुझ पर एक्सपेरिमेंट
या था कोई कमेंट ।
पर दुनिया से पूछो,
क्या है इसका कोई ट्रिटमेंट ॥

क्या ये तुम्हारा खेल था ,
या था एक धोखा ।
तुम्हारे उस चुम्बन-आलिंगन का
याद करु मैं लेखा जोखा  ?

इसे मैं क्या समझूं,
तेरी बेवफाई ।
नहीं, शायद गलती थी मेरी ,
जो तुमसे दिल लगाई ॥

यह कविता मैनें २०१२ में ही लिखा था ।

Suggest Me Please !!

Are you familiar with the man Prem Rawat (प्रेम रावत) ?

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Prem Rawat

For detail click on www.wopg.org and his humanity work on www.tprf.com
He is worldwide famous speaker on the subject peace called as Maharaji and regarded as theMessenger of Peace”.His message is listened by the people of all religion from 90 countries and in 70 languages.He always says there is a God inside our heart ..But he denise the temple,mosque and ..
I think he is an agnostic (not sure about agnosticism ) but  he says it’s not the matter of debate on God.
..My whole families are nonreligious and are the disciple of him and they wanted from me to go in this direction but not in pressure .
In the beginning, I was attracted  to listen his programs because he used to say God is not found in temple, mosque or what we atheist say besides God is not found.
On the subject God he says it is in every heart and we have to find out.

Is it right to spend whole life in it ?
Don’t leave it on my choice !

सिकन्दर कुमार मेहता
Sikandar Kumar Mehta

चोर-चोर मौसेरा भाई

सिकन्दर कुमार मेहता
गौतम अदानी को ऑस्ट्रेलिया मे कोयला उत्खनन का प्रोजेक्ट मिला लेकिन अदानी के इस प्रोजेक्ट के लिये अदानी को पैसा चाहिये था. अदानी ने The Royal Bank of Scotland,Deutsch Bank(German Bank) और HSBC bank जैसी बँको से लोन मांगा सबने मना कर दिया. अदानी Citigroup और JP Morgan Chase जैसी कम्पनियो के पास गया इन्होने भी पैसा लगाने से मना कर दिया. UNESCO इस प्रोजेक्ट के विरोध मे है क्योंकी पर्यावरण और World Heritage Site को इस प्रोजेक्ट कि वजह से धोका उत्पन्न होने वाला है. अदानी को इस प्रोजेक्ट मे पैसा देने को कोई तयार नही था. ऐसे वक्त मे गौतम अदानी के खास दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामने आये.
नरेंद्र मोदी ने एक योजना शुरू कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना. इस योजना से करोडो बँक खाते स्टेट बँक ऑफ इंडिया मे शुरू किये गये और इन खातो मे भारतीय लोगों ने 5000-6000 करोड रुपये SBI मे जमा करा दिये. अब SBI से गौतम अदानी को 6000 करोड का लोन दिया जा रहा है. यह संभवत: किसी भी भारतीय बैंक द्वारा विदेश में किसी प्रोजेक्‍ट के लिए दिया जाने वाला सर्वाधिक लोन होगा. अडानी के पास पहले से करीब 65 हजार करोड़ रुपए की देनदारी है. इसके बावजूद एसबीआई ने उन्‍हें 6000 करोड़ रुपए का लोन देना मंजूर किया है. वह भी तब जब बैंक लगातार यह बता रहे हैं कि कंपनियों को दिया गया कर्ज वसूलना मुश्किल हो रहा है . लोगोकी मेहनत कि कमाई जिसे देश मे रोजगार उपलब्ध करने के लिये या फिर देश मे मुलभूत सुवाधाये उपलब्ध करने पर खर्च करना चाहिये था उसे एक उद्योगपती के फायदे के लिये दिया जा रहा है.नरेंद्र मोदी अपने उद्योगपती दोस्तो के साथ मिलकर इस देश को और इस देश कि जनता को लुट रहा है.

अंधविश्वास पर कटाक्ष

सिकन्दर कुमार मेहता
कोई भी मनुष्य सिर्फ मनुष्य हो सकता है,इससे उपर कुछ भी नहीं । उनमें किसी प्रकार की कोई भी साकारत्मक अथवा नकारात्मक शक्तियां पाने की सामर्थ्य नहीं हो सकती ।
मेरे इस सिधांत पर समाज में सम्मानीय स्थान पाने वाले गुणी-ओझा और नीच स्थान पाने वाले कथित डायन बराबर है ।
गुणी-ओझा से अगर बीमारी का इलाज होता तो आज इतने डाक्टर की क्या आवश्यकता होती और जिन्होंने डाक्टर से समुचित इलाज नहीं कराया वो परिणाम भुगत चुके हैं अथवा भुगत रहे हैं ।
मैं मानता हूं कि ऎसी शक्तियां पाने के लिए कुछ महिला साधना करते हैं पर आज तक किसी को कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ ।

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माडल

आप जरा सोचें कि अगर किसी के पास ऎसी शक्ति होती तो आप डरे-सहमें होते या नहीं ।
उस डायन का समाज में अपनी एक वर्चस्व होती और इस तरह से एक मुहल्ले में दो-चार की संख्या (जैसा कहा जाता है)  में भी होता तो आज पूरी दुनिया उन्हीं डायनों के कब्जा मे होती ।

Attack On Superstition – 01

Sikandar Kumar Mehta
One evening, my aunt was suffering from stomach ache.I was called to examine. When I reached I ashmsed by showing all that happening there, a ojha was doing his best.
I refused to inject and told his relative to stay and wait the result. If ache gets reliefe there no need to give medicine. But the aches got continued.
However,they managed to escape that one fraud, then I gave medicine and injected. After 10 minutes, she was in well condition.
All the people in the society were too angered with me for the disrespect of that fraud but no one told be directly because the ache was cured by medicine.