Monthly Archives: January 2015

ये तो पत्थर के बने हैं

सिकन्दर कुमार मेहता एक बच्चा अपनी माँ के साथ मंदिर गया । मन्दिर के मुख्य-द्वार  पर पत्थर से बने दो शेर को देख बच्चा रोने लगा और कहा कि वह काट लेगा । मां ने समझाया कि ये पत्थर के … Continue reading

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विरह-वेदना

सिकन्दर कुमार मेहता न जाने अब भी मुझे तू क्यों याद आती है, तुझसे बिछड़े तो हो गए बरषों । उस विरह की वेदना आज भी मुझे सताती है, न जाने अब भी मुझे तू क्यों याद आती है ॥ … Continue reading

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प्यार एक सुन्दर-सा धोखा

सिकन्दर कुमार मेहता वो सावन की रात, जब पेड़-पोधे तक सो रहे थे । कमरे की जलती दिए की लौ भी ऊंघने लगी थी, मगर प्यार में भ्रमित दिल क्यों रो रहा था ॥ स्याह सुरत के कारण शायद, तुमने … Continue reading

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चोर-चोर मौसेरा भाई

सिकन्दर कुमार मेहता गौतम अदानी को ऑस्ट्रेलिया मे कोयला उत्खनन का प्रोजेक्ट मिला लेकिन अदानी के इस प्रोजेक्ट के लिये अदानी को पैसा चाहिये था. अदानी ने The Royal Bank of Scotland,Deutsch Bank(German Bank) और HSBC bank जैसी बँको से … Continue reading

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अंधविश्वास पर कटाक्ष

सिकन्दर कुमार मेहता कोई भी मनुष्य सिर्फ मनुष्य हो सकता है,इससे उपर कुछ भी नहीं । उनमें किसी प्रकार की कोई भी साकारत्मक अथवा नकारात्मक शक्तियां पाने की सामर्थ्य नहीं हो सकती । मेरे इस सिधांत पर समाज में सम्मानीय … Continue reading

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Attack On Superstition – 01

Sikandar Kumar Mehta One evening, my aunt was suffering from stomach ache.I was called to examine. When I reached I ashmsed by showing all that happening there, a ojha was doing his best. I refused to inject and told his … Continue reading

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