कविता

प्यार एक सुन्दर-सा धोखा

सिकन्दर कुमार मेहता

image

वो सावन की रात,
जब पेड़-पोधे तक सो रहे थे ।
कमरे की जलती दिए की लौ भी ऊंघने लगी थी,
मगर प्यार में भ्रमित दिल क्यों रो रहा था ॥

स्याह सुरत के कारण शायद,
तुमने मुझे छोड़ दिया ।
क्या तब सही में अन्धा था,
जब पहली नजर में प्यार किया ॥

क्या दिल लगाने का था मुझ पर एक्सपेरिमेंट
या था कोई कमेंट ।
पर दुनिया से पूछो,
क्या है इसका कोई ट्रिटमेंट ॥

क्या ये तुम्हारा खेल था ,
या था एक धोखा ।
तुम्हारे उस चुम्बन-आलिंगन का
याद करु मैं लेखा जोखा  ?

इसे मैं क्या समझूं,
तेरी बेवफाई ।
नहीं, शायद गलती थी मेरी ,
जो तुमसे दिल लगाई ॥

यह कविता मैनें २०१२ में ही लिखा था ।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s