गर्व से कहे – मैं हिन्दू हूँ ,क्योंकि …

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कुछ कटू सत्य

गर्व से कहते हैं की हम हिंदू हैं, क्योंकि:
1- सती प्रथा सिर्फ़ हमारे यहाँ होती थी, बच्चे चाहे भीख माँगे ये कोठे पर पलें, पर पत्नी को पति के साथ ही जलना होता था ।
2- जन्म से छोटा बड़ा सिर्फ़ हिंदू धर्म मे तय होता है ।
3- आप पढ़ेंगे या नाली साफ करेंगे, ये भी जन्म से तय होता आया ।
4- आप इज़्ज़तदार हैं या बीज़्ज़ती बर्दाश्त करने की मशीन, ये भी जन्म से हिंदू तय करता है ।
5- आप क्या करेंगे, ये भी हिंदू धर्म जन्म से तय कर देता है ।
6- अगर आप पुजारी हैं तो मज़े ही मज़े, दलितों की कन्याओं को पसंद करके उन्हे मंदिर मे देवदासी के नाम पर रखकर उनका यौन शोषण हिंदू के अलावा कौन कर सकता है?
7- दहेज जैसा महान कार्य हमारे धर्म मे बड़ी सादगी से होता है ।
8- हम महिला की पत्थर की मूर्ति पूजते हैं, पर किस देश मे 10 साल मे 5 करोड़ कन्याओं की भ्रूण हत्या हो सकती है? जी हाँ, हिंदुत्व मे!!
9- जातिप्रथा हमारी सबसे बड़ी खोज है ।
10- बाल विवाह तो हमारी शान हैं ।
11- अमीरी-ग़रीबी भी हमारे यहाँ जाति से ही होती है भाई साहब !!
12- ज़मींदार भी यहाँ जाति के आधार पर होते थे ।
13- हमने बहुत सी खोज की, पर उनका कोई उपयोग समाज के लिए नहीं किया ।
14- हमने जैसे लोगों को वेद पढ़ने से रोका, वैसा कोई कर सकता है? इसलिए हिंदू महान हैं ?
15- हम तो बलात्कार भी करते हैं और शिकायत करने वाले को उल्टा टंगवा देते हैं, सिर्फ़ तालिबान ही हमारी टक्कर का हो सकता है…
16- हमने दलितों को स्कूलों मे नहीं घुसने दिया, क्या कोई धर्म हमारी बराबरी कर सकता हैं?
बहुत कुछ है मेरे पास तुम्हारी धज्जिया उड़ाने को, बस अभी इतना ही,हिंदू धर्म महान है, क्योंकि यहाँ:
-बच्चा हो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–नाम रखो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–गृह प्रवेश करो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–पाठ करवाओ तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–कथा करवाओ तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–मंदिर जाओ तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–शादी हो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ ।
–कोई मर गया हो तो भी ब्राह्मण को पैसे खिलाओ!! ब्राह्मण क्या तेरे घर आता है पैसे माँगने? नहीं भाई, घर आना पड़ा तो लूट काए की, उन्होने तो ऐसा समाज रचा है की अगर उसे ना बुलाओ तो तुम्हारे काम ही समाज मे अवैध हैं !
हिंदू धर्म महान है क्योंकि यहाँ धर्म के नाम पर लूटने की-
-निर्मल बाबा को छूट है ।
-असाराम बापू को छूट है ।
–सुधांशु महाराज को छूट है ।
–दाति महाराज को छूट है ।
–इच्छधारी बाबा को छूट है ।
और कितने ही बाबा धर्म के नाम पर दुकान खोल लो, सबको छूट है… हिंदू धर्म महान है क्योंकि इसकी संस्था संघ, अँधा है, वो सिर्फ़ धर्मांतरण पर बोलता है.. हिंदू होते हुए आप जो मर्ज़ी अधर्म करो, सबकी छूट है । आप भी उसी धर्म की नैया मे सवार हो, लूटो तुम भी बाबा बन जाओ ।
प्रस्तुतकर्ता – सिकन्दर कुमार मेहता
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ईश्वर को नहीं मानते थे अल्बर्ट आइंस्टीन, पढ़िए 1954 में लिखा गया ये ख़त

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3 जनवरी 1954 को आइंस्टीन ने फिलॉसफर एरिक गुटकिंड को एक खत लिखा, जो आगे चलकर बहुत मशहूर हुआ।
दरअसल एरिक ने अपनी किताब  Choose Life: The Biblical Call to Revolt आइंस्टीन को भेजी थी, जिसके जवाब में आइंस्टीन ने एक चौंकाने वाली चिट्ठी लिखी।
आइंस्टीन यहूदी धर्म की इस थ्योरी को नहीं मानते थे कि ‘यहूदी ईश्वर की सबसे प्रिय संतानें हैं।’
जर्मन भाषा में लिखे गए आइंस्टीन के उस ख़त का मजमून कुछ यूं है-

प्रिय एरिक,

भगवान शब्द मेरे लिए मानवीय कमजोरी की अभिव्यक्ति से ज्यादा कुछ और नहीं। बाईबिल, आदरणीय लेकिन बचकानी कहानियों के संग्रह से ज्यादा कुछ और नहीं है। इसकी कोई भी व्याख्या,चाहे वो कितनी भी परिष्कृत क्यों न हो, इनके बारे में मेरे विचार नहीं बदल सकती। इनकी व्याख्याएं विविधताओं से भरी हैं और मूल लेखन से इनका कोई लेना-देना नहीं है। दूसरे सभी धर्मों की तरह यहूदी धर्म भी बचकाने अंधविश्वास के अवतार से ज्यादा कुछ और नहीं है।यहूदी लोग, जिनमें गर्व के साथ मैं भी शामिल हूं और जिनकी मानसिकता से मैं गहराई से जुड़ा हुआ हूं, उनमें ऐसी कोई विशिष्टता नहीं है, जो दूसरे लोगों में न हो। मैं अगर अपने अनुभव की बात करूं तो यहूदी लोग दूसरे लोगों से किसी भी तरह बेहतर नहीं हैं। हालांकि वो सत्ता विहीन हैं,इसलिए संवेदनाएं उनके साथ हैं। अगर इस बात को छोड़ दिया जाए तो मैं उनमें ऐसी कोई खास बात नहीं देखता जो इस धार्मिक धारणा को सही साबित करता हो कि यहूदी लोग ईश्वर की सबसे प्यारी संतानें हैं।

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सामान्य तौर पर मैं इसे काफी दुखदायी पाता हूं कि एक तरह आप विशिष्ट होने का दावा करते हैं। दूसरी ओर आप गर्व के बनावटी दोहरे आवरणों के बीच बचने और छिपने की कोशिश करते हैं। इनमें पहला आवरण बाहरी है जिसमें आप एक व्यक्ति होते हैं, जबकि दूसरा आवरण आंतरिक है जिसमें आप यहूदी हो जाते हैं। अब मैं खुले तौर पर कहता हूं कि जहां तक बौद्धिक प्रतिबद्धता का सवाल है, हमारे विचार नहीं मिलते, लेकिन मानवीय व्यवहार की मूलभूत बातों पर हमारे विचार एक-दूसरे के काफी करीब हैं। इसलिए मैं समझता हूं कि अगर हम वास्तविक मुद्दों की बात करें तो हम एक-दूसरे को कहीं बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
एक दोस्ताना शुक्रिया और शुभकामनाओं के साथ

आपका
ए. आइंस्टीन

श्रोत – http://www.myletter.in

प्रस्तुतकर्ता – सिकन्दर कुमार मेहता
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हिंदू धर्म की तारीफ़ में दो शब्द, आप भी जरूर पढ़िए, फिर गर्व से कहिए “मैं हिंदू हूं”

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मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ. पूरी दुनिया में कोई ऐसा धर्म नही होगा जैसा हमारा धर्म है. बिलकुल साइंटिफिक धर्म है हमारा. किसी सरकारी विभाग को चलाने के लिए बॉस, एडिशनल बॉस, पीए, क्लर्क, सहायक क्लर्क, चपरासी, गार्ड, स्वीपर आदि रखे जाते हैं, वैसे ही हमारे हिन्दू धर्म में इतना वैज्ञानिक विभाजन है कि पाखाना उठाने वाले से लेकर चमड़ा छीलने वाला,दूध दुहने वाला, सब्जी उगाने वाला, अन्न उपजाने वाला, लोहा-लकड़ी, गहना, कपड़ा बनाने वाला,कपड़ा धुलने वाला,बाल बनाने वाला, लड़ने वाला और भगवान से बात करने वाला तक मिलेगा.
काम की अधिकता को देखते हुए सात हजार से अधिक कामगार (जातियां) बनाये गए हैं हिन्दू धर्म में.पशुओं में भी ऐसा विभाजन नहीं होगा जैसा हमारे हिन्दू धर्म ने मनुष्यों में कर रखा है. क्या ऐसा धर्म दुनिया में कहीं है? क्यों न गर्व हो हमें अपने इस हिन्दू धर्म पर?
दुनिया ने तरक्की की है तो संविधान बना है, राज-पाठ का विधान बना है, जबकि हजार वर्ष पूर्व ही हिन्दू धर्म ने विधान, संविधान बना दिया था. धर्म शास्त्र अलग, नीति शास्त्र अलग, दंड शास्त्र अलग. वेद, पुराण, स्मृति, रामायण, महाभारत और हिन्दू धर्म का संविधान आईपीसी, सीआरपीसी अलग जिसे ‘मनु स्मृति’ कहा गया, यहां कब के बन गए थे. जब दुनिया सभ्यता के बारे में जानने की कोशिश कर रही थी उस समय हिन्दू धर्म ने यह तय कर रखा था कि किसे पढ़ना है, किसे पढ़ाना है. किसे घोंघा सीप, लोहे का गहना पहनना है और किसे सोने, चांदी, हीरा, जवाहरात आदि. किसे नए कपड़े पहनने है और किसे दूसरों द्वारा दिए गए पुराने कपड़े, किसे छप्पन भोग खाना है और किसे जूठन, किसकी औरतें घर के अंदर पर्दे में रहेंगी और किसके घर की औरतें वक्ष ढंककर नही रहेंगी, किसे जमीन पर थूकना तक नही हैं, तालाब और कुएं से पानी भी नही पीना है और किसे ऐसा करने पर दंड देना है, किसे वेद-पुराण पढ़ना है और किसे इसे पढ़ने या देखने या छूने या सुनने पर मौत के घाट उतारना या शम्बूक, एकलब्य की तरह दण्डित करना है.
क्या ऐसा वैज्ञानिक धर्म दुनिया में कहीं है? क्या ऐसा इंतजाम किसी धर्म में हजार वर्ष पूर्व ही हुआ है? है न गर्व करने लायक हमारा हिन्दू धर्म? इसीलिए मुझे तो गर्व है अपने हिंदू धर्म पर.

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अब आप ही बताइये कि दुनिया में ऐसा कौन सा धर्म है जिसमे मुहम्मद साहब, ईसा मसीह,गुरु नानक, बुद्ध,महाबीर को छोड़कर कोई और पैगम्बर या भगवान है ? भगवान के मामले में कितने दरिद्र हैं ये मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, बौद्धिष्ट, जैनी भाई, इनके वहां एक अल्लाह, गॉड या भगवान है, या है ही नहीं. जबकि हमारे यहां हाथी,घोडा, कुत्ता, बन्दर, गिद्ध, कौवा से लेकर पेड़, पौधा, पत्थर,पहाड़ तक भगवान हैं. हिन्दू धर्म में कुल 33 करोड़ देवी देवता हैं. भगवानो के मामले में पूरी दुनिया में इतना रिच धर्म कोई नही है.
हर काम के लिए मनुष्यों में जाति और देवताओं में भी हर काम के लिए अलग-अलग देवता, है क्या कहीं विद्या की देवी अलग, धन की अलग, वर्षा के देवता अलग, हवा के अलग, आग के अलग, प्रलय के अलग, निर्माण के अलग, विध्वंस के अलग, मतलब 33 करोड़ देवता हैं हमारे. अभी सन्तोषी माता, आशाराम बापू, सत्य साईं बाबा आदि का निर्माण जारी है, जो 33 करोड़ के बाद आएंगे. क्या पूरी दुनिया में ऐसा इंतजाम किसी धर्म में है? है न आविष्कारक और वैज्ञानिक धर्म हमारा ?  क्यों न गर्व करूँ मैं अपने इस धर्म पर?
इन्वेंशन भी खूब किया है हमारे धर्म ने, खड़ाऊं पहन के उड़ना, पुष्पक विमान बनाना, अग्नि रेखा की खोज, आग, पानी, हवा आदि से युक्त बाण व एक से एक अस्त्र-शस्त्र किस धर्म में निर्मित हैं ? दुनिया का अकेला धर्म है हिन्दू धर्म जहां एक से एक (गपाष्टिक) शोध और खोज हैं. आश्रम में गुरुकुल, गुरुकुल में शिक्षा, शोध, यह सब किस धर्म में है? (भले ही हमने सुई का भी आविष्कार न किया हो पर स्वप्नदर्शी तो हम हैं ही ) हम आखिर इस अद्भुत धर्म पर क्यों न गर्व करें? जिस धर्म में इतनी खूबियां हों आखिर उस पर क्यों गर्व नहीं होगा? इसीलिए हमे गर्व है अपने हिन्दू होने पर.
(Source: Whatsapp)
प्रस्तुतकर्ता- सिकन्दर कुमार मेहता
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