पुनर्जन्म आत्मा की थ्योरी – एक सफ़ेद झूठ !

Follow Tweets by @1manatheist

image
फोटो - जागरण

हमारे देश में अंधविश्वास इतना ज्यादा प्रचलित है कि लोग किसी के मुँह से कुछ भी सुन लें, तो उस पर आँख मूँद कर विश्वास कर लेते हैं। फिर चाहे वह किसी चमत्कार के बारे में हो अथवा पुनर्जन्म जैसी एकदम फालतू कल्पनाओं के बारे में।

आपने बहुत ऐसे किस्से सुने होंगे जिसमे किसी इंसान के ‘पुनर्जन्म ‘की दावे किये जाते हैं की अमुक व्यक्ति का पुनर्जनम हुआ था / है । हिंदी फिल्मो की तो भरमार है जिसमें पुनर्जन्म’के किस्से लेके कहानिया बना दी जाती हैं। पर वास्तव में ऐसा है क्या ? क्या पुनर्जन्म की कहानियां सच होती हैं? क्या जो दावे किये जाते हैं वे प्रमाणित होते हैं ?
नहीं … हरगिज नहीं।
पुनर्जन्म की कहानियां केवल कपोल कल्पनायें और झूठी अफवाहे के सिवा कुछ
नहीं होती।
देखिये किस प्रकार पुनर्जन्म की कहानिया झूठ के सिवा कुछ नहीं होती-
1- आज तक किसी पुनर्जन्म लिए बच्चे ने यह
क्यों नहीं कहा की वह पिछले जन्म में मुर्गा,सूअर , गधा ,ऊंट या कोई अन्य पशु पक्षी था? जबकि पंडो ने बताया है कि ८४ लाख योनियो के बाद मनुष्य जन्म मिलता है।

2- आज तक किसी मुस्लिम का पुनर्जन्म
क्यों नहीं हुआ? क्या आत्माए भी हिन्दू मुस्लिम आदि हो सकती हैं?
हिन्दू आत्मा फिर से हिन्दू के घर ही जन्म लेती है जबकि ४२०० के आस पास धर्म और संप्रदाय दुनिया में मौजूद हैं।

3- आज तक कोई अंतराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जन्म क्यों नहीं हुआ , अर्थात
किसी सऊदी अरब के नागरिक की भारत के किसी गाँव में पुनर्जन्म क्यों नहीं हुआ ?
किसी भारतीय हिन्दू का किसी ब्रिटिश राज्य में पुनर्जन्म क्यों नहीं हुआ ?
पुनर्जन्म के जितने भी किस्से होते हैं वे 100% मामलो में मृतक के और पुनर्जन्म लिए बच्चे के निवास स्थान से कुछ सौ किलो मीटर के दायरे में ही क्यों होते हैं?
दोनों ही परिवार वाले किसी न किसी बिंदु पर एक दूसरे से या संस्कृति से परिचित या मेल मिलाप वाले होते हैं ।

4- याद रखने की शक्ति केवल मस्तिष्क में
होती है , मृत्यु के बाद मस्तिष्क नष्ट हो जाता है ।
आत्मा को निर्लेप चेतन बताया गया है , फिर वह स्मृति कैसे रख सकती है ?
क्या आत्मा का भी मस्तिष्क होता है जो शरीर से अलग होता है और सारे डेटा उसमें स्टोर होते रहते हैं?

5- मृतक की आत्मा ने जिस व्यक्ति के रूप में जन्म लिया होता है , क्या ऐसा आत्मा की मर्जी से होता है? यदि आत्मा अपनी’ मर्जी ‘ से जन्म ले सकती है तो वह अपनी मर्जी से मर
भी तो सकती है ?

यदि आत्मा अपनी मर्जी से जन्म ले सकती है तो सारे गरीब इंसानो की आत्माओं को अमीर के घर जन्म लेना चाहिए था । हमें ज्यादातर पुनर्जन्म के किस्से मध्य या गरीब परिवार में ही सुनने को मिलते हैं।
अत: पुनर्जन्म एक झूठ है जो धर्म गुरुओ द्वारा बोला और सुनाया जाता है जिसके चक्कर में आके भोली भाली जनता हजारो सालो से मुर्ख बनती आ रही है ।
हमें हमारे धार्मिक ग्रंथो और विज्ञान ने बताया कि समय के प्रारंभ में इस धरती पर कुछ नहीं था ये धरती सूर्य का एक अंग थी फिर वो अंग अलग हो कर सूर्य के चारो ओर चक्कर काटने लगा इसलिए धरती के अन्दर आज भी भीषण गर्मी हैं। उस ठन्डे हिस्से को भुप्रष्ट या भूपटल कहते हैं जिस पर हम रहते हैं इस भूपटल के ठंडा होने के बहुत अन्तराल के बाद, इस पर पानी बरसा, फिर भिन्न-भिन्न प्रकार कि वनस्पति उगी, फिर एक लम्बी अवधि के उपरान्त, जानवर आये फिर वनस्पति व जानवरों कि दीर्घावधि के बाद मनुष्य इस धरती पर आया। ये पूरी कार्यप्रणाली एक ज्ञात सत्य हैं।

स्रोत. – व्हाट्सएप
प्रस्तुतकर्ता – सिकन्दर कुमार मेहता

हमसे जुड़ें –
फेसबुक – एक नास्तिक – 1manatheist
ट्विटर – @1manatheist

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s